पेड़-पौधों के बीच पार्क में सैर करने से तनाव कम होता है. शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन भी मिलती है. सड़क या गलियों में वॉक करने से बचन चाहिए क्योंकि कंक्रीट के रास्तों पर घुटनों में दर्द हो सकता है. प्रदुषण से होने वाले नुकसान के अलावा एक्सीडेंट का भी खतरा होता है.
कुछ देर नंगे पैर घास पर चलने से एक्यूप्रेशर पॉइंट दबते हैं, जिसका पुरे शरीर पर अच्छा असर होता है. कुछ जगहों पर वॉक के लिए पत्थरों से रफ सरफेस भी तैयार किया जाता है.इस पर भी वॉक करना फायदेमंद है, लेकिन पक्की सड़क से बचना चाहिए. सड़क पर चलना ही है तो साथ में बनी मिट्टी की कच्ची सड़क पर वॉक करें.
१) वॉकिंग/जॉगिंग शूज पहनकर ही वॉक पर जाएं. कपडे थोड़े ढीले और हवादार हों.
२) पुरुषों को अच्छे और थोड़े ढीले अंडरगारमेंट पहनने चाहिए. ज्यादा टाइट अंडरगारमेंट पहनने से हर्निया की आशंका बढ़ सकती है.
३) वॉक शुरू करने से पहले शरीर खासकर पैरों को स्ट्रेच कर लें झुकने से बचें. रीढ़ की हडडी सीधी होनी चाहिए, लेकिन उसे जबरन अकड़ाएं नहीं. ध्यान रहे कि वॉक कर रहे हैं मार्च-पास्ट नहीं.

४) फेफड़ों के बजाय पेट से सांस लें.
५) हाथ जरूर हिलाएं, लेकिन उन्हें उतनी ही ऊंचाई तक ले जाएं, जिससे दिक्कत न हो. हाथों की नेचुरल स्विंग होने चाहिए.
६) वॉक के दौरान मोबाइल या वॉकमैन के ईयर फोन से गाना या क्लासिकल म्यूजिक भी सुन सकते हैं. जिससे दिमाग रिलैक्स होता है. सड़क पर वॉक करते हुए ईयरफोन लगाकर गाना सुनना खतरनाक हो सकता है.
७) आपस में या फोन पर गप मारते हुए वॉक न करें.इससे चलने के फायदे कम हो जाते हैं, क्योंकि शरीर और दिमाग के बीच तालमेल होना जरुरी है. ज्यादा गर्मी में वॉक से बचें.इससे हिट स्ट्रोक हो सकता है.
८) एड़ी के ज्यादा इस्तेमाल से बचें. पंजों पर जोर रहे तो बेहतर है,वरना टखने में दर्द हो सकता है.
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